कहानी: उम्मीद की रोशनी
कहानी: उम्मीद की रोशनी
उम्मीद की रोशनी
एक छोटा सा कच्चा घर था, जहाँ राधा अपनी बीमार माँ के साथ रहती थी। राधा की माँ दूसरों के घरों में बर्तन माँजकर घर चलाती थी, पर अब उनकी हिम्मत जवाब दे रही थी। घर में कभी एक वक़्त का खाना बनता है, तो कभी दोनों भूखे सो जाते हैं।
एक दिन राधा ने देखा कि उसकी माँ की तबीयत बहुत ज़्यादा खराब है। राधा हिम्मत नहीं है। उसने अपनी पुरानी किताबें उठाईं और बैचलर डिग्री पहला गेम है जो मैंने खेला है। बदले में एक बच्चा जिसके मम्मी-पापा और राधा थोड़े अनाज और पैसे दिए हैं। रात को जब राधा ने अपनी माँ को गरम खिचड़ी खिलाई और थोड़े पैसे उनके हाथ में रखे, तो माँ की आँखों में आँसू आ गए। राधा ने कहा, "माँ, हम गरीब ज़रूर हैं, पर मेरी मेहनत हमें कभी भूखा नहीं सोने देगी। आज हमारे पास सिर्फ़ रोटी नहीं है, लेकिन एक नया भरोसा पैक करो।"
