Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

संदीप सिंधवाल

Tragedy Inspirational


3  

संदीप सिंधवाल

Tragedy Inspirational


कब हुआ

कब हुआ

1 min 211 1 min 211

आदमी आदमी ही रहा इंसान कब हुआ

इधर बस्ती थी पहले श्मशान कब हुआ।


एक आस्था ने ही बांधा था एक धागे में 

एक रस्ते का पत्थर भगवान कब हुआ।


बहता खून देख के खून तो खौला होगा 

अपना ही खून बहा के हैरान कब हुआ।


मेरे घर का रास्ता मालूम दुश्मन को भी

सब अपने तो रास्ते का भान कब हुआ।


जिंदगी खोजते जिंदगी जी गया 'सिंधवाल'

तो फिर पता चला कि परेशान कब हुआ।


Rate this content
Log in

More hindi poem from संदीप सिंधवाल

Similar hindi poem from Tragedy