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Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Tragedy


4.5  

Vijay Kumar उपनाम "साखी"

Tragedy


कौन बिना मतलब

कौन बिना मतलब

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कौन बिना मतलब किसी को याद करता है

कौन बिना मतलब रब से फरियाद करता है

ज़रा संभलकर चल बड़ी मतलबी दुनिया है,

कौन बिना मतलब यहां वक्त बर्बाद करता है


जो अपने होते,वो बिना मतलब जुड़े होते है

कौन बिना मतलब यहाँ हमें आदाब करता है

कौन बिना मतलब रिश्ते को आबाद करता है

कौन बिना मतलब किसी को याद करता है


कौन बिना मतलब यहाँ पर राम-राम करता है

फिर भी तू, साखी सबसे मिल-जुलकर रहना,

निःस्वार्थ रिश्ता ही हमको आफताब करता है

बिना मतलब का भाव, हमें आसमान करता है


वो ही दुनिया में सच्चे कर्मयोगी कहलाते है,

जो खुद को निःस्वार्थ कर्म चिराग करता है

खुदा ही उनके घट में हमेशा वास करता है

जो निःस्वार्थता को जीवन का श्वांस करता है।


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