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Meeta Khurana

Abstract Inspirational


3.7  

Meeta Khurana

Abstract Inspirational


जिंदगी

जिंदगी

1 min 143 1 min 143

दो तरह के लम्हों में बँटी मुख्तसर सी जिंदगी

कुछ गमजदा पल रहे और कुछ पलों की खुशी रही,

खुशी के पलों से ज्यादा गमों के पल याद आते रहे,

हम आँसू बहाते रहे और दिल को दुखाते रहे,

आज जब दिल से गुफ्तगू की तो उसने कुछ यूँ समझाया,

क्यों तू खुशी के पल खोता है, ऐ नासमझ तू बेवजह ही रोता है,

जो कुछ तेरा साथ गलत हुआ, तू उसे भुलाता जा,

बहुत खूबसूरत सी है ये जिंदगी, बस तू मुस्कराता जा

हाँ तू मुस्कराता जा...


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