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Meeta Khurana

Abstract Inspirational


3.7  

Meeta Khurana

Abstract Inspirational


जिंदगी

जिंदगी

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दो तरह के लम्हों में बँटी मुख्तसर सी जिंदगी

कुछ गमजदा पल रहे और कुछ पलों की खुशी रही,

खुशी के पलों से ज्यादा गमों के पल याद आते रहे,

हम आँसू बहाते रहे और दिल को दुखाते रहे,

आज जब दिल से गुफ्तगू की तो उसने कुछ यूँ समझाया,

क्यों तू खुशी के पल खोता है, ऐ नासमझ तू बेवजह ही रोता है,

जो कुछ तेरा साथ गलत हुआ, तू उसे भुलाता जा,

बहुत खूबसूरत सी है ये जिंदगी, बस तू मुस्कराता जा

हाँ तू मुस्कराता जा...


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