जीवन और संघर्ष
जीवन और संघर्ष
जीवन का हर पल, हर क्षण संघर्ष ही तो कहलाता हैऔर गर संघर्ष ना हो जीवन में तो, जीवन ही निषप्राण हो जाता है।पूरक बनकर एक दूजे के संग जिए जाते हैं क्यों संघर्षों के होने पर फिर हम घबराते हैं।
जीवन के स्पंदन से जीवन के अवसान तक, संघर्षों की आंधी में घिरते हैं उबर जाते हैं, फिर भी न जाने क्यों संघर्षों में घिरने पर, हम हौंसला हार जाते हैं, क्यों संघर्षों के होने से फिर भी हम घबराते हैं।
जीवन अटल वाक्य है... संघर्ष अर्धविराम, छोटे-छोटे अवरोधों से होती है हौसलों की पहचान, संघर्षों को जीतकर जो पार हो जाते हैं, जीवन रण में वही योद्धा विजय पताका फहराते हैं।
