Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Vijay Kumar

Tragedy


2  

Vijay Kumar

Tragedy


इस बरसात में

इस बरसात में

1 min 202 1 min 202

इस बरसात में अब वो बात नहीं है

मेरे हाथों में जो उसका हाथ नहीं है

प्यार भरे लम्हे जो अब साथ नहीं है

दिलों में भी अब वो जज्बात नहीं है,


मेरे कदमों के साथ उसके कदम नहीं है

आंखों में भी अब वो इंतजार नहीं है

इस बरसात में अब वो बात नहीं है

मेरे हाथों में जो उसका हाथ नहीं है,


मेरी धड़कनों में जो उसका नाम नहीं है

मेरे ख्वाबो में भी अब उसके ख्वाब नहीं है

मेरी बातो में उसका जिक्र नहीं है

इस दिल में भी अब वो उमंग नहीं है,


पहले जैसे अब हालात नहीं है

 उसका भी तो अब साथ नहीं है

इस बरसात में अब वो बात नहीं है

मेरे हाथों में जो उसका हाथ नहीं है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Vijay Kumar

Similar hindi poem from Tragedy