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Vijayanand Singh

Inspirational


4.6  

Vijayanand Singh

Inspirational


इंसान बनके रहने दो

इंसान बनके रहने दो

1 min 278 1 min 278

इंसान को इंसान बनके रहने दो

इंसान में बस, इंसान ही पाया जाये।


क्यों खड़ा कर रखा है नफ़रतों का हिमालय

आओ, रिश्तों में जमी बर्फ़ को पिघलाया जाये।


उड़ते पंछी और हवाओं ने कहाँ मानी हैं सरहदें

क्यों न, इन इंसानी सरहदों को मिटाया जाये।


क़ौम का इतिहास दफ़्न है क़िताबों में

नफ़रत को अब,न नफ़रत से मिटाया जाये।


हाँ, तुमने पढ़ी होंगी लाखों क़िताबें

ढाई अक्षर से इस संसार को बचाया जाये।


हर एक के दिल में इंसानियत महफ़ूज रहे

इंसान को बस, इंसान ही पुकारा जाये।


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