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अजय एहसास

Abstract


4.0  

अजय एहसास

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इन दिनों

इन दिनों

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सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों

कुछ की बदल गयी है देखो चाल इन दिनों

जो हाथ मिलाते थे अदब से करें आदाब

अब पूछते नहीं हमारा हाल इन दिनों

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।।

क्या बात है मचा है क्यो बवाल इन दिनों

पूंजीपती ही देखो मालामाल इन दिनों

सड़कों पे उतरते हैं क्यों दम तोड़ते किसान

क्यो कर रहे किसान को बेहाल इन दिनों

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।।


सबका ही सो गया भविष्य काल इन दिनों

सुनते हैं इक नया कोरोना काल इन दिनों

मरते रहें मजदूर साहबान क्या करें

मखमल की सेज पर करें धमाल इन दिनों

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।।


दीपक जला दिये हैं पीटे थाल इन दिनों

खुलते न थे जो हाथ ठोंके ताल इन दिनों

क्या क्या न किया हमने तुम पे करके भरोसा

लेकिन हुए हैं देख लो कंगाल इन दिनों

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।।


तपसी भी झेलते दिखे जंजाल इन दिनों

उलझे हैं सुन्दरी के रूप जाल इन दिनों

साधू हो या फ़कीर या हो औलिया कोई

किरदार पर ही उठ रहे सवाल इन दिनों

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।।


इस ठंड में खुद का रखो ख्याल इन दिनों

चादर फटी पुरानी रख संभाल इन दिनों

कपड़े खरीदने की भी हिम्मत नहीं रही

नये साल में ओढ़े पुराना शाल इन दिनों

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।।


नफ़रत को छोड़ दिल में प्यार पाल इन दिनों

शादी हुई रख बीबी को खुशहाल इन दिनों

जो हैं कुंवारे ऐ खुदा! तू थाम उनका हाथ

हल्दी से पीले मेंहदी से कर लाल इन दिनों

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।।


'एहसास' है, बचा है बस कंकाल इन दिनों

कम हो गया उमर का अब इक साल इन दिनों

अब हो गयी है महंगी सब्जी दाल इन दिनों

ज़िन्दा हैं और जी रहे हर हाल इन दिनों

सुनते हैं आ गया है नया साल इन दिनों।।


                      


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