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Anjali Singh

Abstract


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Anjali Singh

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हक

हक

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हक पाना चाहते हो? 

हक यूँ हीं नही मिलते!


पहले गिरते है फिर संभलते हैं 

हकीकत में हक तब मिलते हैं !


जब हम बिखरते है तब कोई

उन बिखरी चीज़ों को जोड़कर संजोता है!


हकीकत में हक तब मिलते हैं

जब शोर नहीं होता घनघोर अंधकार है होता

और कोई आशा की दीपक की तरह जलता है!


हक पाना चाहते हो 

हक यू हीं नही मिलते!


पहले गिरते है फिर संभलते हैं 

हकीकत में हक तब मिलते हैं!



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