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VIVEK ROUSHAN

Abstract


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VIVEK ROUSHAN

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हार कर मुस्कुराना

हार कर मुस्कुराना

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हादसों से डरना मत न जख्मों से घबराना

जीत कर चुप हो जाना हार कर मुस्कुराना


दिल लगाना मंज़िल से कभी रास्तों से नहीं

रास्तों को आता है हादीसों को भूल जाना 


मैंने जिसे अपना कहा जिसे मैंने प्यार किया 

उन लोगों ने मुझे ख़्वाब में भी नहीं पहचाना


जो मन को भाएगा वो सब लिखता जाऊँगा

अब मुझे दुनियाँ से कुछ भी नहीं छुपाना।


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