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Lipi Sahoo

Tragedy


4.5  

Lipi Sahoo

Tragedy


गुमनाम

गुमनाम

1 min 291 1 min 291

कभी कभार

अपने चारों तरफ़ नज़र फेर लो

कहीं कोई जिंदगी से हार कर

सहमा हुआ मायूस तो नहीं बैठा


उम्मीद का दीया

चारों तरफ़ के बदहवा से

कंपकंपाती हुई

बुझने की कागार पर तो नहीं


अपने दोनों हाथ पसार कर

उस लौ को सम्भाल लो

दो कदम ही सही साथ उसके चलो 

थोड़ी सी तसल्ली परोस दो


कोई होगा फ़ालतू का इस सोच में कहीं

वक्त जाया ना हो जाए

किसी गुमनामी की अंधेरे में

खोने से पहले उसको थाम लो


खुशी की लत तो सबको है

ताउम्र नीकल जाती उसकी तलाश में

जो कुछ भी था खुशनुमा लगने लगता

कफ़न में दफ़न होने से पहले


याद दिलाना होगा उन्हें 

भागते हैं जो अपनी पहचान बनाने

पर वो खुद ख़ुदा है

ये जानने में सेंकड़ों जन्म गवां देते हैं।


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