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Antariksha Saha

Children Stories


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Antariksha Saha

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गुड़िया

गुड़िया

1 min 206 1 min 206

मेरे मैले कपड़े को ही देखा

दिल ना देखा जो तेरे लिए धड़कता है

बचपन मे इस भाई ने कितने डाँट तेरे लिए खाई है

मेरे साइकिल मे दुनिया समाती थी कभी

अभी मेरी दुनिया छोटी पर गई

चम चमाती तेरी दुनिया के आगे

बचपन मे धीरे चलते चलते तेज दौड़ती थी तू

अभी भी अँधेरे से डर लगता है

अभी भी रात को सोते सोते डर से झपट जाती तू

मेरी गुड़िया तू सच मे बहुत बड़ी हो गई है

सबकी कीमत तय करने लगी है

हम गरीब हैं पर दिल से दुआ करते है

रब तुझे सलामती दे खुश रखे !


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