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अनामिका वैश्य आईना

Abstract


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अनामिका वैश्य आईना

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गज़ल

गज़ल

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ग़र खुदा का रहम नहीं होता

वो मिरा भी सनम नहीं होता.. 


बोल देते सखे सभी बातें  

कोइ दिल में वहम नहीं होता.. 


जान जाती मिरी बिन हमसफ़र 

ग़र प्रिये का करम नहीं होता..


छोड़ देती जहां ख़ुशी से मैं 

लक्ष्य ख़ातिर जनम नहीं होता 


प्रेम-दीपक जला दिया करते 

ग़र जगत का सितम नहीं होता।


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