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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Tragedy


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GOPAL RAM DANSENA

Abstract Tragedy


एक पड़ोसी

एक पड़ोसी

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घर, गाँव, शहर, देश

मैं हूँ एक, वह है शेष

मैं उसका, उसका मैं

एक दूजे को मानते पड़ोसी I


लड़ाई, आतंक, मिटाई पर

उसने मुझे मैंने उस पर

ईर्ष्या, स्नेह पूरा न्यौछावर

कभी वो मुझे, उसको देख मैं

एक दूजे को मानते पड़ोसी I


हर खुशियों का ठिकाना है पड़ोसी

हर अपना दास्ताँ, निशाना है पड़ोसी

हर माथे का पसीना है पड़ोसी

हर फर्ज को निभाना है पड़ोसी

अपना कद भी हैं जानते पड़ोसी

एक दूजे को मानते पड़ोसी I


हैं हम एक इंसान पड़ोसी में

हमारा हर एक निशान पड़ोसी में

पड़ोसी से ही एक जहान है बसा

क्यों पड़ोस में हैं कोई परेशान बसा

देखो हरदम सम्मान पड़ोसी में

एक दूजे को मानते पड़ोसी I


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