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Nand Kumar

Abstract


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Nand Kumar

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दलितों के मसीहा

दलितों के मसीहा

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चौदह अप्रैल अठारह सौ इक्यावने मे नर तन पाया ।

पिता राम जी मां भीमा बाई ने अनुपम प्यार लुटाया।।


लाड प्यार मे बीती शिशुता वाल्यकाल मे फिर आए ।

भेदभाव लख विद्यालय मे वह सहन नही कर पाए ।।


उच्च निम्न के बीच उस समय पर गहरी थी खायी । 

भीमा ने प्रतिकार हेतु ली मन ही मन नीति बनाई ।।


शिक्षा ही वह अस्त्र हमे जो उच्च मान दिलवाए । 

यही सोच ले उत्तम शिक्षा ज्ञान मान निधि पाए।।


अपने जैसे शोषित पीडि़त की पीडा को मिटाया । 

संविधान मे नियम बनाकर उनका मान बढाया ।।


हिन्दू धर्म की नीति बुराई का जब भान हुआ था ।

बुद्ध शरण मे आकर के अमृत का पान किया था ।।


पद सम्मान मिला लेकिन शोषित को नही भुलाया ।

दीन ही की सेवा कर निज जीवन सफल बनाया ।।


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