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आकिब जावेद

Others


5.0  

आकिब जावेद

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दास्ताँ

दास्ताँ

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दास्ताँ तुम्हें इक सुनानी है अभी

वो आँखों में बंद कहानी है अभी

पूज के तुझको हुआ मैं काफ़िर।

दिल में तस्वीर बसानी है अभी

चहचहाता है इक मेरा भी घरौंदा

बच्चों को कहानी सुनानी है अभी

ये मेरी साँसे गिरफ़्त में ले के

दिल के दर्द को दबानी है अभी                

कश्ती को अपने बचानी है अभी

कागज़ की कश्ती और ये तूफ़ान।                 



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