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Raja Sekhar CH V

Abstract


3  

Raja Sekhar CH V

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चलते चलते

चलते चलते

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ज़िंदग़ी के सफ़र में चलते चलते,

बनते चले जाएँ बहुत रिश्ते नाते,

अलग जज़्बात हर किसी से पाते,

हमउमर दोस्त मिलते और जाते |१|


कुछ रिश्ते रास्ते में छूट जाते,

कुछ हमेशा के लिए खो जाते,

एहसास होता है चलते चलते,

के अकेले सभी हैं आते जाते |२|


इसलिए ज़िन्दग़ी बिताएँ खाते पीते,

हरएक किसम के तजुर्बे पाते पाते,

कई तरह की बातों को कहते सुनते,

कई हालात वारदात को देखते देखते |३|


चाहे ज़िन्दग़ी बीत जाए अलग अलग काम करते करते,

चाहे जिंदगी बीते अपने ख़्वाहिशों को सच करते करते,

चाहे जिंदगी बीते सभी तरह मुश्किलों को झेलते झेलते,

फिर भी ख़ुशी से ज़िन्दग़ी को हमेशा जिएँ हँसते मुस्कुराते ।४।


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