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Padma Motwani

Abstract Classics Inspirational


4.7  

Padma Motwani

Abstract Classics Inspirational


बूँद

बूँद

1 min 167 1 min 167

पानी की एक एक बूंद 

नवजीवन बन जाती है।

ओस बन चमकती हैं 

उपवन को महकाती हैं। 


जब यह खेतों पर गिरती

अनाज लहलहाता हैं ।

पसीना बन बहती हैं जब

यह अमूल्य हो जाती है।


जब यह सागर में मिलती 

स्वजीवन सफल करती है।

बूँद एक सीप से टकराते ही

अनमोल मोती बन जाती है।


पावन अमृत की कुछ बूँदें 

हृदय तल को छू जाती हैं।

श्रावणी फुहार की कुछ बूँदें 

सर्वत्र प्रेम रंग बरसाती हैं। 


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