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Vivek Netan

Romance


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Vivek Netan

Romance


बस तू ही

बस तू ही

1 min 226 1 min 226

तेरी मासूमियत से भरी बाते आज भी रुलाती है

जब भी याद आती हो तुम आँखे छलक जाती है

लाख कोशिश की मैंने तुम्हें भुलाने की मगर

हर खुशी हर गम बस तू ही तू याद आती है।


गुजरा हूया वक्त लौट कर तो कभी आता नहीं है

तेरे होने का एहसास है के दिल से जाता नहीं है

ऐसा लगता है के लौट के आ गई हो तुम फिर से

जब कभी भी मेरी गली में कोई आहट आती है।


देर होने पर तेरा मुझ से नाराज होना याद आता है

अब देख कर मुझे हर कोई पास से निकल जाता है

आँखों को आज भी इंतजार है तेरा आने का ऐसा

जो भी सूरत देखूं उस में तू ही तू नजर आती है।


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