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Dhirendra Panchal

Romance


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Dhirendra Panchal

Romance


बस संवरती रहे

बस संवरती रहे

1 min 213 1 min 213

वो गरजती रहे  

वो बरसती रहे

मेरी जान है वो याद मुझे करती रहे

ऐ खुदा तुझसे इतनी सिफ़ारिश मेरी

वो जहां भी रहे बस संवरती रहे


हो ना हैरान वो  

उसको एहसास दे

मैं भी खुश हूं यहां बस तेरे वास्ते

जब भी मौका मिले अपनेपन से उसे

मेरी खातिर दुआएं भी करती रहे

वो जहां भी रहे बस संवरती रहे


रौशनी दे गई  

मोम सी गल गई

मुझको दरिया बना बर्फ में ढल गई

उसको जीना पड़े ना बंदिशों में कभी

कैद हो ना कभी वो महकती रहे

वो जहां भी रहे बस संवरती रहे।


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