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SHRADDHA SINGH

Abstract

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SHRADDHA SINGH

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भक्त और भगवान

भक्त और भगवान

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भक्त वो नहीं जो भक्ति की,

भक्त वो है जिसके मात्र होने से ही

भगवान प्रसन्न हो कि ये मेरा भक्त है।

ऐसी ही भक्ति देखी है मैंने चीकू में।

 

वो इंसान जो भगवान को मानता तक नहीं था

और आज भगवान शिव का सोमवार को

हमेशा के लिए व्रत रखने का व्रत रख लिया।

पूरे दिन बिना कुछ खाए पीए आसान नहीं है ,

पर देखी है ऐसी भक्ति भाव जो आज भगवान को समर्पित है।


भगवान और भक्त के बीच का पारस्परिक संबंध है

और जो आनंद है कुछ बात ही अलग है उसकी।

और सबसे बड़ी बात कुछ ना होते हुए भी सब कुछ होने का संतोष धन है।

शायद ही ऐसी भक्ति और ऐसा भक्त कभी देखा होगा।

ऐसा लगा जैसे कलयुग में सतयुग का प्राणी का जन्म हो गया हो।



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