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बचपन और पचपन

बचपन और पचपन

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बचपन में बड़े होने की धुन थी ,

अब जवान रहने की सनक है ,

टॉफी तब पसंद थी, 

दवाई अब जरूरत है।


बचपन और पचपन में भेद नहीं 

बचपन में भी दोस्तों के संग थे 

अब बुढ़पे में भी दोस्त साथ हैं। 


पहले सीना तन कर 

लड़की ताड़ते थे 

अब अंकल बन उन्हें निहारते हैं। 


पहले शरारत से सब को तंग 

किया करते थे 

अब हमारी ज़िद से 

लोग परेशान हैं।

बचपन और पचपन में भेद नहीं ।


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