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Shailaja Bhattad

Classics


5.0  

Shailaja Bhattad

Classics


बारिश की मस्ती

बारिश की मस्ती

1 min 281 1 min 281

ये बारिश की मस्ती, बेखुदी में महकती

हर तरफ, हर तरफ है ये पानी की बूंदें। 

दिखता नहीं मुझे कोई अपने सिवाय

छा रहा है जुनून।


है हर तरफ हर तरफ बारिश का जादू 

थिरकते हैं कदम सुन रिमझिम फुहारें।

इस पल ने किया है कैसा ये जादू

हो रहा है कुछ एहसास नया-नया।


खिल गई जिंदगी पूरी होने लगी आरजू

खुल गया है मेरी आरजू का पिटारा। 

हूं बस अब मैं खुद की ही सदा सदा 

ना परवाह किसी की, न खुशियां किसी की। 


यह पल न छूटे ना बारिश ही रूठे

बस चलता रहे यूं ही ये सिलसिला।

 रंगीन सी है अब मेरी ये दुनिया

 वर्षा से हुआ है आलिंगन ऐसा।


मोती सी बूंदों से श्रृंगार मेरा

हसीन पल की ये हसीन या दें।

लगने लगा बेवजह नहीं है

मेरी सारी ये बातें।


ये बारिश की मस्ती, बेखुदी में महकती

हर तरफ, हर तरफ है ये पानी की बूंदें

दिखता नहीं मुझे कोई अपने सिवाय।


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