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shekhar kharadi

Romance


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shekhar kharadi

Romance


अतृप्त पौधा

अतृप्त पौधा

1 min 180 1 min 180

तुम बारिश की रिमझिम बूंदों सी

मैं बंजर अन ऊपजाऊ जमीन सा ।

तुम फव्वारें बनकर आ जाना

मैं अतृप्त पौधा सा बन जाऊँगा ।

तुम मन से संपूर्ण बरस जाना

मैं अपूर्ण तन सा भींग जाऊँगा ।

तुम हृदय से नदी में बह जाना

मैं प्रेम सागर में मिल जाऊँगा ।

तुम अंदर लहरों सी छा जाना

मैं बाहर रोमांचक हो जाऊँगा ।


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