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Garima Kanskar

Tragedy


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Garima Kanskar

Tragedy


अपना घर

अपना घर

1 min 224 1 min 224

एक औरत को

ससुराल में एक दिन

में वो प्यार वो अपनापन

वो मान सम्मान नही मिल जाता 

जो उसे अपने घर मे मिलता है

उस मान सम्मान को पाने के लिये

सबका दिल जीतने के लिये

वक्क्त लगता है


उसमें बहुत वक्त लगता हैऔर

धर्य के साथ समर्पण सेवा

के साथ अपनी नींद

अपनी भूख अपनी प्यास

अपनी खुशी अपना दुख


अपना चैन सुकून का त्याग करके

हर गम को भुलाकर

मुस्कुराना होता है

और सबका ख़्याल रखना होता है

तब जाकर कही 

उसका ससुराल अपना घर

बनता है


उसे लगता ही नहीं है कि

वो कही और है

पर बिना वक्त दिये

ये संभव नहीं है।


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