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सुरशक्ति गुप्ता

Abstract


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सुरशक्ति गुप्ता

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अंतिम सफर

अंतिम सफर

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जब आपके वजूद पर लोग ऊंगली उठाने लगे

और आपकी ओर से नजरे ही फेर ले

तब जिन्दगी जीने की चाहतों का

आखिरी मोड़ बहुत भयावह हो जाता है


हर तरफ से उम्मीदें समाप्त होने लगती है 

तब तन और मन को विश्राम में धकेलना और

नैराश्य में जीवन की ओर ले जाना ही

अंतिम सफर है

दर्द नाक है


पर लोगों को इसी की फिराक है

जा रहा हूं तोड़ कर उम्मीदें सारी

बहते हुए समन्दर में खुद को डुबाने

न याद रखना मुझे हसरतों में

न गमों की उन दीवारो में


चाहता हूं बस यही

हर शाम ढले आपकी खुशनुमा

हजारों में

प्यार भरी मुस्कान के साथ अलविदा दोस्तों।


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