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Hilal Saeed

Drama


5.0  

Hilal Saeed

Drama


अनमोल रिश्ते

अनमोल रिश्ते

1 min 232 1 min 232

ज्यादा नही, कुछ ख़ास बाकी है

वो खूबसूरत लम्हे,

शायद बचपन की कुछ याद बाकी है।


वो नादानियां, बचपन की शरारतें

वो गुज़रे लमहे जो याद आते हैं,

चेहरे पर एक मुस्कराहट,

आखों में नमी का अहसास कराते हैं।


वो पापा का मुझे क़ाबिल बनाकर,

मुझे ज़िममेदारियो से जोड़ देना,

अपने खवाबों को छोड़कर,

वो मेरे टूटते खवाबों को जोड़ देना।


मेरी खामियां छुपाना,

खूबियाँ बताना मुझको

माँ की मोहब्बत कुछ ऐसे

भी मिली मुझको,


हर ख्वाहिश हर ख्वाब

को मुकम्मल किया

मेरे सब अरमानो को,

अपने अरमानों का दर्जा दिया,

कुछ इस तरह भी मुझे

अपनी मोहब्बत का पता दिया।


मेरी ला हासिल ख्वाहिशों को

मुझे हासिल करा दिया,

कुछ इस तरह भी माँ पापा ने

मुझे खुशियों से रूबरू किया।


ज्यादा कुछ नहीं,

कुछ खास बाकी है,

वो मुकम्मल रिश्ते, वो खूबसूरत

लम्हों की कुछ याद बाकी है।


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