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Rekha gupta

Abstract


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Rekha gupta

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अमिट छाप

अमिट छाप

1 min 350 1 min 350

तुम्हारी स्मृति की 

अमिट छाप 

बहुत गहरे अंकित है 

मानस पटल पर मेरे 

जो घनी अनजानी 

धुंध को चीरती हुई

मेरे मन की सतह तक

दस्तक दे जाती है 


और सब कुछ ऐसे साफ 

प्रकाशित हो जाता है 

जैसे पूर्णिमा का चाँद अपनी 

चांदनी बिखेर रहा हो

जब मैं उस प्रकाश को

अपने अंदर समेटती हूं

तो तेरा साया मेरे भीतर 

मुस्कराता है।

 

       


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