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अजनबी सा रिश्ता !

अजनबी सा रिश्ता !

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उसमें और मुझमें

कुछ तो 

जरूर है, 

कोई ना कोई कनेक्शन 

कहीं ना कहीं से। 


हमसे जुड़ा जरूर हैं, 

एक अजनबी सा रिश्ता 

लगता हैं उससे !


जब भी उसे देखते हैं, 

उसकी तरफ खींचे 

जाते हैं, 


लगता हैं ऐसा 

जैसे कोई डोर 

अपनी ओर खींच रही हो, 

क्या उसको भी 

ऐसा होता होगा। 


उससे पूछे भी तो पूछे कैसे, 

एक अजनबी सा रिश्ता 

लगता है उससे !


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