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Dr Sushil Sharma

Abstract


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Dr Sushil Sharma

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अगर हम तुम्हें याद आने लगेंगे

अगर हम तुम्हें याद आने लगेंगे

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अगर हम तुम्हें याद आने लगेंगे

भुलाने में हमको ज़माने लगेंगे


मिटा के खुदी को चले साथ तेरे

वही लोग तुमको पुराने लगेंगे


अगर साथ छोड़ा हमारा कभी जो

सफर में तुम्हें याद आने लगेंगे


बचाया जिन्हे था कभी डूबने से

यही लोग तुमको डुबाने* लगेंगे


तुम्हें प्यार सबसे ज़ियादा किया था

तुझे भूलने में ज़माने लगेंगे


भरोसा किया है कभी खूब जिनपे

वही राज तुमसे छुपाने लगेंगे।


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