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Sanjay Aswal

Others


4.3  

Sanjay Aswal

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अधूरी ख्वाहिशें

अधूरी ख्वाहिशें

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जिंदगी क्या है?

मौज मस्ती, खाना पीना,

दोस्तों के संग सैर सपाटा

ना चिंता ना कोई फिक्र

बस बेफिक्री से जीना।


जिंदगी क्या है?

प्रेमिका के इंतजार में खोए रहना

आंखों में हजारों सपने लिए

उसका ही होने कि दुआ करना।


जिंदगी क्या है?

एक अच्छी जिंदगी कि चाहत

जहां सब कुछ हो अपने हाथ में

जो दिल कहे हम करे 

अपनी खुशियों में खूब झूमे ।


जिंदगी क्या है?

परिवार की जिम्मेदारियों में

खुद को झोंक देना,

सुबह शाम,

उसकी जरूरतों को सर पर ढोना,

अपनी इच्छाओं का गला घोंट कर।


जिंदगी क्या है?

एक एकाकी बुढ़ापा,

पथराई आंखे,

अपनों से तिरस्कृत जीवन,

एक खालीपन लिए जिंदगी,

आंखों में सूनापन और अपनों से दूरियां।


जिंदगी क्या है?

क्या होनी चाहिए?

कैसी होनी चाहिए?

इसी तमन्ना में जिए जाते हैं,

वो शुरू होती है उम्मीदों के साथ,

पर जब ख़तम होती है

तो बहुत कुछ रह जाता है,

बनकर अधूरा,

हमारी

ख्वाहिशों में....।



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