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नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : abstract

डूबने वाले का उदय निश्चित है बस भोर का इंतज़ार करने में आलस ना read more

2     232    29    189

क्रोध मेरे आकाश को आया और लगा वो तुम्हें दिखाने बहुत जतन से मना रही हूँ कह कर कि read more

2     214    11    193

वह मुसाफ़िर हर वक्त एक रास्ता बदल गया read more

1     190    41    204

बिछड़ जाने के बाद भी उनका प्यार अमर हो जाता read more

1     329    21    210

जो मर गए मार दिए गाए जिन्होंने मार डाला तुमने और मैंने read more

1     360    13    211

ताकत है वो तुम्हारी, जिसे अक्सर लोग कमजोरी समझ लेते read more

1     229    49    214

हैं हौसले बुलंद मेरे इतने आसानी से कहाँ मार कर जा read more

1     309    45    218

जब पाप की गंगा है बहती, तब कलम कवि की है read more

1     434    45    218

जान जाती है इश्क़ में अक्सर जान देने का हौसला read more

1     387    42    219

एक उम्र बिता दी, उसे समझाने में रिश्ता उसका मेरा कह दो ना करें तकल्लुफ आने का, कि read more

1     331    19    221

अब मुक्त हो चुका था आपने आप को प्रभु को सौंप चुका था न यहाँ रुकने का मन read more

1     316    16    222

सब कहते थे, धूल है, राख है, खंडहर है, रेगिस्तान है , अरे ! श्मशान read more

1     289    52    227

तुम्हारा खड़ा होना, मेरे मन की चौखट पर और मेरे इंतजार का बिखरना, तुम्हारे read more

1     99    2    232

आह न निकले तनिक कंठ से शिव बनकर विषपान read more

1     306    46    234

अब वे पहचान में भी नहीं आते न ही इच्छा होती है हमारी उन्हें पहचानने की खुद read more

1     276    44    236

अनगिनत कविताओं की हो जाएगी मृत्यु उन जंगलों की तरह जिनके पेड़ कट चुके read more

1     214    41    238

इसका नहीं कोई अंतिम छोर अपनी रूह को मेरी रूह से तू read more

1     322    40    240

कुछ कबाड़ मैंने फिर रख लिया, संभाल के मैंने पागलों की भांति, दौड़ के, फिर read more

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जहाँ कुपोषित है कानून और लोग सभी अंधे read more

1     250    35    243

क्या तुमने सुना कभी बुद्धत्व को कविता में ? जो कविता में हो बुद्धत्व, तब मैं read more

1     252    34    245

वो थी मेरी अंतरात्मा जो साथ मेरे हरदम खड़ी छोड़कर उसे अकेले चल पड़ी मैं दूसरों read more

1     366    33    246

काठ की दीवारों इन पर लटके हुए ताले देख मैं, अपनी आज़ादी की तारीख़ को फिर से आगे read more

1     339    33    260

यह तो एक सुखद उपवन है, कलयुग के कहरों read more

2     1.9K    16    262

इसीलिए लहरें बन कर तुम, तट पर आ टकराती read more

1     315    53    266

और मैं चुपचाप चुप हो गई हमेशा के read more

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पर्याय ही तो है हम एक दूसरे read more

1     205    41    276

जब कभी ग़रीबी ने आकर जीना मुश्किल कर डाला हो मज़बूरी और लाचारी ने मिल कर read more

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मैं जब भी लड़खड़ाया या डगमगाया, माँ तूने रास्ता दिखला भट्काव से बचाया read more

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नदी कहीं खो गई नदी कहीं है ही नहीं अब हर ओर सागर ही सागर है निरा खारा खारा read more

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