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VIVEK ROUSHAN

Abstract


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VIVEK ROUSHAN

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अभी बहुत दूर जाना है

अभी बहुत दूर जाना है

1 min 100 1 min 100

ये क्या की उससे दूर होकर मुंह फुलाए बैठे हो

अभी तक हिज़्र को दिल से लगाए बैठे हो

वो है की वहाँ अपने बच्चों के जन्मदिन मना रहा

तुम हो की यहाँ खुद को पागल बनाए बैठे हो


उठो! मेरी जान की अभी बहुत दूर जाना है

एक शख्स से हार के बैठे हो आगे ज़माना है

जख्म तुम्हारे दिल का यहाँ कोई न देखेगा

खुद ही अपने जख्म पे तुम्हें मरहम लगाना है



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