आओ मिलकर दीप जलाएँ!
आओ मिलकर दीप जलाएँ!
आयी दिवाली खुशियों वाली, फैला घर-घर में उजियाला
अंधकार को दूर भगाता, ये प्रकाश का अभिनंदन है।।
जगमग जगमग दिये जलेंगे, दीपों का त्योहार दिवाली।
पर इतना सब ध्यान रखेंगे, घर कोई न रह जाये खाली।।
अमावस की अंधियारी रातों में, मिट्टी के तुम दीप जलाना।
पटाखों और फुलझड़ियों की, लेकिन कोई जिद न करना।।
छोड़ के सारे द्वेष भाव को, मीत- प्रीत की रीत निभाएँ।
दूर करे जो मन के अँधेरे, ऐसा अब एक दीप जलाएँ।।
सब जन पर स्नेह लुटाएँ, फिर खुशियों के दीप जलाएँ।
ममता समता मानवता का, मनमोहक सुन्दर पुष्प खिलाएँ।।
जगमग कर दें घर चौबारा, सर्वहित का संकल्प उठाएँ।
मंगलमय हो जाये जीवन, हर सुख हर खुशहाली पाएँ।।
दीपमालिका की झिलमिल से, आशा के कुछ फूल खिलाएँ।
आयी दिवाली खुशियों वाली, आओ मिलकर दीप जलाएँ।।
