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Raashi Shah

Abstract


5.0  

Raashi Shah

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आँखें

आँखें

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वो दो छोटी-सी,

प्यारी-सी आँखें,

जो सबको,

एक पृथक दृश्य दिखाती है,

किसी को अच्छाई का दृश्य,

तो किसी को,

उसी में,

बुराई की झलक दिखाती है।

किसी को आँखों में,

आँसू दिखते है,

तो किसी को लगता,

वही आँखों की चमक है।

देखा है इन आँखों ने,

समस्त संसार​,

कई और आँखें;

परंतु देखने में यह रह गए असमर्थ​,

एक​-दूजे को!

फिर भी इनका रिश्ता है अनोखा,

कभी न दिया एक​-दूजे को धोखा।

कभी न देख पाए,

एक​-दूसरे को,

फिर भी की एक​ दूसरे की,

देखने में सहायता,

बिलकुल वैसे,

जैसे निभाते है सच्चे मित्र​,

अपनी 'दोस्ती'!

वो दोस्ती,

जो दो या अधिक लोगों को,

साथ में बाँधती है,

उनकी कमज़ोरी नहीं,

बल्कि ताक़त बनकर​,

उन्हें हौसला देती है,

उनके लिए,

मुश्किल समय का,

सहारा बनती है,

उन्हें मुस्कुराने की,

वजह देती है,

दुनिया से लड़ने की,

हिम्मत देती है,

और​,

जीवन भर के लिए,

एक सच्चा मित्र​!

इसलिए, किसी ने कहा है सच ही

"दोस्ती हो, तो दोनों आँखों जैसी,

जिन्होंने कभी एक​-दूसरे को नहीं देखा,

फिर भी,

साथ छोड़ते नहीं"

क्योंकि-

"दोस्ती से कीमती,

कोई जागीर नहीं होती,

दोस्ती से खूबसूरत​,

कोई तस्वीर नहीं होती,

दोस्ती यूँ तो,

एक कच्चा धागा है,

मगर इस धागे से मज़बूत​,

कोई ज़ंजीर नहीं होती"


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