Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

S Ram Verma

Romance


2  

S Ram Verma

Romance


आलिंगन !

आलिंगन !

1 min 185 1 min 185

मैं जब होती हूँ 

तुम्हारे आलिंगन में 

तो ये पुरवाई हवा 

भी कहाँ सिर्फ हवा 

रहती है !


वो तो जैसे मेरी 

साँस सी बन मेरी 

रगों में बहने लगती है !


मुझे तो जैसे हर एक 

गुलों में एक तुम्हारा ही 

चेहरा दिखने लगता है !


मन उड़ता है

कुछ यूँ ख़ुश हो कर  

जैसे इच्छाओं ने

पर लगा लिए हो !


और रूह तो मानो 

स्वच्छंद तितली का 

रूप धर उड़ने लगती है ! 


मैं जब होती हूँ  

तम्हारे आलिंगन में 

तो ये पुरवाई हवा 

भी कहाँ सिर्फ हवा 

रहती है !


Rate this content
Log in

More hindi poem from S Ram Verma

Similar hindi poem from Romance