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आज भी कायम है

आज भी कायम है

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दोस्ती का अर्थ ....

मैने तुमसे जाना ,

दोस्त अपना केवल ,

मैने तुमको माना।


क्या फर्क पड़ा?

हम कभी मिले नहीं ,

पर समझते हैं एक दूजे को ,

हमेशा यहीं।


मैं बुलाती ,

तुम आते ,

इसी को कहते हैं ,

सच्चे नाते ।


लोग यूँ ही बदनाम करते हैं ,

इस इंटरनेट के प्यार को ,

उन्हे क्या पता ...

यहाँ दोस्त मिलते हैं तकरार को।


हम मिले,

फिर दोस्त बने,

अपने दिल की बाते,

खुल कर कहते चले।


ना दिन देखा ....

और ना देखी रात ,

बस भावनावों में बहते रहे ,

हम दोनो के जज्बात।


आज भी कायम है ,

अपनी दोस्ती का वो रंग ,

जब मैं बुलाऊँ और तुम चले आओ ,

लिए कई ज़वाब अपने संग।।


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