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एक कविता - : 'सबसे भूखा read more

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बचपन के बारे में एक read more

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एक ही ज़िंदगी है, अपनी इच्छाओं को पूरी करो यही दुनिया के सारे द्वार खोलता है, मैंने read more

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कविता
© vivek verma

Drama Inspirational

छोटे बच्चों को ना रोको, खेलने दो रेत में पाक रहने दो उन्हें, अपना गणित सिखलाओ read more

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जब तख्त की ज़ुबाँ बोलनेे लगे अखबार, तो कैसे लिख दूँ कि कलम की ताकत अभी ज़िंदा read more

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सत्य हूं मैं, बिक चुका हूं झूठ के बाज़ार में । मैं अकेला चल रहा read more

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जिसका गहना उसका मान सम्मान है औऱ जिसकी मुस्कुराहट उसके आज़ाद विचारों की पहचान है read more

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विनाश सदैव विकल्प है प्रथम खटकाओ सभी read more

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वो दर्द की रात थी... तेज बरसात read more

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इन मय-क़शी सदाओं में ज़रा सी अज़मत भर देना... गुज़ारिश है तुमसे, एक बार, बे-दिली read more

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लबों के छिपे राज़ो को जानते है, चलो आज कुछ नया करते read more

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क्या करता हूँ मैं अपने अंदर के खालीपन के साथ ? जानने के लिए पढ़िए यह read more

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भोर - सी read more

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बस तुम यूं ही आ read more

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भूखा read more

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एक read more

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मेरे read more

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भीड़
© Aanis Khan

Drama Fantasy

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कर सकूँ कुछ read more

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जो मैं लिखता read more

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एक मर्मस्पर्शी read more

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शांत चेहरे की read more

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दो राहें थी, इक घर को इक सपनों की ओर read more

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रूह से रूह ने मिलके सीखा देह का हर एक दाग़ read more

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जब तुम लिखना बंद करो, शाम हो जाए, ज़िन्दगी की, ढल जाएँ हम संग-संग, चलो लिखते हैं तब read more

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सूर्य मुस्कुराकर, खुद छिप जाएगा, कि तारों की रौशनी ही, अब इस जहाँ को, नई राह read more

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इस सरज़मीं पे ज़ुबान-ए-मोहब्बत सही या दास्तान-ए-सितम सही मेरे read more

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वो जिनकी आँँखों में मायूसी के लिए कोई जगह ही नहीं अपनी पलकों में सिर्फ़ जुनून read more

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थकी - थकी - सी है यह बेज़ार ज़िंदगी अब इसे थोड़े आराम की ज़रूरत है पसीने - पसीने हो गई read more

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