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Pankaj Bhushan Pathak "Priyam"
Literary Colonel
AUTHOR OF THE YEAR 2020 - NOMINEE

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*पंकज प्रियम* मुसाफ़िर हूँ मैं लफ़्ज़ों का ख़ुद से बंधा नियम हूँ मैं। लफ्ज़ समंदर लहराता शब्दों से सधा स्वयं हूँ मैं। साहित्य सृजन साधना प्रेम-पथिक "प्रियम" हूँ मैं। ******************** विगत 20 वर्षों से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं।प्रारम्भिक स्कूली शिक्षा के समय से ही कविता, गज़ल, नाटक, कहानी,... Read more

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Submitted on 09 Jul, 2019 at 22:54 PM

लोग अक्सर खाने को जीते हैं। हम तो अक्सर जीने को खाते हैं

Submitted on 07 Jul, 2019 at 12:43 PM

मुसाफ़िर अल्फ़ाज़ों का समंदर हूँ मैं लफ़्ज़ों का मुझे खामोश रहने दो, उमड़ता प्रेम का दरिया, उसे आगोश बहने दो। मचल जो दिल गया मेरा, बड़ा तूफ़ान आएगा- मुसाफ़िर अल्फ़ाज़ों का, मुझे खामोश चलने दो।। ©पंकज प्रियम

Submitted on 07 Jul, 2019 at 12:33 PM

शीर्षक-बरसात मुक्तक धरा की देख बैचेनी,.....पवन सौगात ले लाया तपी थी धूप में धरती,.. गगन बरसात ले आया। घटा घनघोर है छाई,....लगे पागल हुआ बादल- सजाकर बूँद बारिश की, चमन बारात ले आया।। ©पंकज प्रियम


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