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कुसुम पारीक

  Literary Colonel

अहसास

Abstract

"ज़िन्दगी भर मैं खुद को तृप्त समझता रहा -----तुम तृषित रही।" "आज मैं तृषित हूँ ----- तुम तृप्त दिख...

5    106 0

स्याह पन्ने

Abstract

डायरी पढ़ते-पढ़ते सुधार गृह से वापिस आए शुभम की आंखें बरबस ही छलक आई, बरबस ही पास के कमरे में सो रहे ब...

2    182 0

लघुकथा अपरिग्रह

Inspirational

परोपकार की भावना को जगाती एक दिलचस्प लघु कथा

2    259 0

टूटता तिलिस्म

Tragedy Inspirational

आज फिर वही सब मेरे बेटे के साथ होने लगा जो मेरे साथ होता था, पर आज किसी अदृश्य शक्ति ने मुझसे वो कहल...

2    207 0

छुपा खंजर

Tragedy

यही मेरा मान है..यही मेरा अभिमान है।

1    126 0

दग्ध हृदय

Tragedy

कोई ऐसा बादल आएगा जो इस तपती धरती को तृप्त करते हुए उसके वज़ूद का अहसास करवाएगा

2    164 1

अनछुआ मन

Inspirational

अब मुझे मेरा बेटा वापिस मिल चुका था।

2    344 0

दबी हुई गूंज

Inspirational

इस कुत्ते की तो कोय-कोय करने की भी औकात नहीं बची थी।

2    273 37

प्रायश्चित

Tragedy

सबके हाथों के छलकते हुए जाम इस सच्चाई की ठंड में जम चुके थे।

1    165 1

अपना घर

Inspirational

सौम्या ने देखा कि माँ "भाभी" को अपने पास बैठाकर, उनकी थाली में खाना परोस रही थी व पापा, भैया की पीठ ...

2    437 37

असली हकदार

Inspirational

आज मुझे मेरी माँ की ऊँचाई का भान हो चुका था।

2    289 35

लघुकथा "पूंजी"

Inspirational

अब पतिदेव भी मुझसे सहमत थे।

2    129 1

लघुकथा - बदलता हुआ मौसम

Inspirational

भाभी अभी घर में नई है। पाँच-सात साल निकलेंगे वहाँ तक अपनी ज़िम्मेदारियाँ बखूबी निभाने...

2    110 1

लघुकथा - अव्यक्त भाव

Drama Inspirational

राघव ने मेरा हाथ पकड़ते हुए बैठाया और कहा, "शुचि, माँ एकदम ठीक हैं। उन्होंने मुझे...

2    107 0

लघुकथा

Drama

आज भी उसी अवसाद में घर से ४ जोड़ी कपड़े लेकर अनजाने सफ़र के लिए निकल पड़ी थी ।

4    131 0

अवलंबन

Drama

म्हारे बिना मुझे नहीं पता अब मेरी प्रजाति भी कब लुप्त हो जाए ?" कहते हुए विरहणी चिड़िया ने भी दम तोड़...

2    332 5

वामा ग्रन्थि

Drama

"जीवन हो या कैनवास .. आप जितने रंग भरते हो वे खुद की खुशी के लिए भरते हो लेकिन इतराता तो केवल चित्र ...

2    286 44

प्रायश्चित

Tragedy

यह तेरा तीसरा वीरता पुरस्कार है।

2    461 36

आँगन की तुलसी

Drama Inspirational

"काश ! मैं समय रहते समझ पाता कि मौसमी पौधे कभी भी तुलसी नहीं बन सकते।"

2    367 25

तुम हो न

Others

"आपकी नौकरी दूसरी जगह होने की वज़ह से आप घर परिवार को समय नही दे पाते और धीरे धीरे यह जिम्मेदारी अधिक...

1    401 22

तुम हो न

Inspirational

मुझ पर आपका विश्वास करना ही है, हर संकट की घड़ी में आपका यह कहना तुम हो न.....।

1    128 3

अंतः चेतना

Inspirational Others

जीवनसाथी की जगह वैसे भी कोई नहीं ले सकता। पति जब भी दौरे या अपने घर से वापिस लौटते, सुरभि सारे गिले-...

4    347 19

काल गणना

Drama Tragedy

अब घड़ी की प्रत्येक टिक-टिक नश्तर बन कर मेरे दग्ध हृदय को चीरती हुई महसूस हो रही थी।

2    189 7

मौताणा

Tragedy

अब इन सर्द हवाओं में सचमुच भीमजी का खून जम चुका था व पेड़ से लटकती लाश के साथ भीमजी की लाश भी जलने क...

2    336 11

मूक बोझ

Inspirational Tragedy

विनीत हमें बचाना होगा हमारी गुड़िया को, इसको इंद्रधनुष में रंग भरने देना होगा।

2    513 54

अवबोध

Children Inspirational

किशोर मन को संतुष्ट करने के साथ ही मेरे चेहरे पर भी सन्तुष्टि के भाव उभर आए।

3    159 7

जाल

Inspirational

थोड़ी देर में वह वापिस उड़कर दाना लेने जाती है परन्तु बिखरे दानों पर न बैठते हुए इधर उधर फुदक रही है

2    270 11

शम्बुक वध

Drama

अपनी दुरूह पूर्ण ज़िन्दगी को जीने के लिए हौसलों की पोटली को लाद कर वह फिर चल पड़ा।

2    315 14

अपेक्षाओं का बोझ

Inspirational Tragedy

जब धरती ही नहीं सह सकी तो वह तो आखिर एक बच्चा था। अब मेरे पास प्रायश्चित के आँसूओं के सिवाय कुछ नही...

2    205 9

रिश्तों की दहलीज़

Drama

"और मेरा व्यवहार कभी भी स्वच्छंद न हो जाए ,इस हेतु तुम्हारी माँ से सलाह- मशविरा करके ही मैं हर काम ...

3    190 6

सर्द होती सम्वेदनाएँ

Drama

थोड़ी ही देर में वे दोनों खाली हाथ वापिस लौट रहे थे । हम ने एक ओट ली व जैसे ही वे गुजर गए !वहां पहुं...

3    234 10

माँ की ममता

Drama

सीता देवी धीरे-धीरे अपनी आँखें मुंदती हुई अंतिम यात्रा के लिए महाप्रयाण पर जा चुकी थीं।

3    3.1K 28