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Vinita Rahurikar

डॉ विनीता राहुरीकर 9826044741 M.Sc. botany, M.A. drawing painting, हिंदी D.C.H., श्री गोल्डन सिटी 28, फेस 2 होशंगाबाद रोड़ जाटखेड़ी भोपाल मध्यप्रदेश 1. अब तक विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में 200 से अधिक रचनाओं का प्रकाशन। जिसमे से 75 कहानियां। 2. पराई ज़मीन पर उगे पेड़- कहानी संग्रह, ऊँचे दरख्तों की छाँव में- कविता संग्रह घर-आँगन, पुस्तक मित्र बाल कथा संग्रह एक अन्य बाल कहानी संग्रह बोधि से शीघ्र प्रकाशनाधीन Two loves of my life- अंग्रेजी उपन्यास The Karma Chakra- उपन्यास पेट्रीज पब्लिशिंग यू.एस. से प्रकाशित। कविता संग्रह "रौशनी का पेड़" बोधि प्रकाशन से प्रकाशित। सेना पर लिखा उपन्यास -एक जिंदगी दो चाहते 3. राष्ट्र भाषा गौरव, साहित्य श्री, साहित्य शिरोमणि, साहित्य वाचस्पति, मध्य प्रदेश भूषण, ब्रह्मदत्त तिवारी स्मृति पुरस्कार, डॉ उमा गौतम तथा श्रीमती लक्ष्मी देवी स्मृति बाल साहित्यकार पुरस्कार, शब्द निष्ठा लघुकथा सम्मान, सतीश मेहता महिला लेखन पुरस्कार, पंडित हरप्रसाद पाठक स्मृति पुरस्कार। अखिल भारतीय शकुंतला कपूर स्मृति लघुकथा सम्मान, श्री गया प्रसाद खरे स्मृति पुरस्कार, गंगा अधिकारी स्मृति बाल पुरस्कार। 4. यूके, यू एस ए स्थित रिकॉर्ड होल्डर रिपब्लिक संस्था द्वारा हिंदी लेखन के क्षेत्र में किये गए उल्लेखनीय योगदान हेतु एक्सीलेंस सर्टिफिकेट भारतीय सेना पर लिखे गए उपन्यास हेतु भी अन्तर्राष्ट्रीय संस्था द्वारा एक्सीलेंस सर्टिफिकेट। कहानी 'पाप' तथा 'फौजी की पत्नी' को पायोनियर बुक कम्पनी का सर्वश्रेष्ठ कहानी पुरस्कार। कहानी 'पराई जमीन पर ऊगे पेड़' तथा 'तुम्हारी मंजूषा' भी पुरुस्कृत। कहानियो का अंग्रेजी सहित 10-12 भारतीय भाषाओं में अनुवाद। Vinitarahurikar @gmail.com राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय मंच का संचालन। आकाशवाणी, दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण। read more

  Literary Colonel

वर्जनाएँ...

Inspirational

उखाड़ दिया है वो फर्श अपने पैरों के नीचे का जो मिट्टी से दूर रख बंजर कर रहा था उपजाऊ धरत...

1    25 0

विश्व एकता दिवस

Others

हो जाये परिंदों की तरह आजाद जिन्हें नहीं लगता कोई वीजा

1    21 0

जीवन एक खेल...

Others

सफल-असफल का खेल कभी जीत, कभी हार कभी जश्न, कभी मायूसी

1    140 0

ज्ञान

Classics

जिसके पास जितना धन उसके पास उतना ही ज्ञान।

1    105 0

गर तुम न मिलते

Romance

तुम न मिलते गर मुझे तो सच में मैं कभी औरत नहीं हो पाती।

1    138 0

प्रतीक्षा

Romance

अब कभी भी, किसी भी दिन नहीं जाऊँगा तुम्हें छोड़कर।

1    221 0

सपनों की दुनिया में

Abstract

सपनों में ही सही पर जी तो लूँ....।

1    105 0

इतिहास दोहरा रहा

Classics

आज मैं भी अपने पोते से खेल रहा होता।

1    196 0

आह्वान

Classics

एक नई कोंपल बस जन्म लेने ही वाली है।

1    160 0

आहुति

Others

मैं बिना जीवन जिए ही कब्र में पहुँच गया..

1    20 0

जीत

Drama

उंगली पर लगी ये बून्द भर स्याही आज सार्थक हुई....।

1    135 0

मतदान.

Inspirational

सीमा के भीतर एक दायित्व बनता है हमारा भी की हम सुरक्षा करें देश की

1    25 0

समानांतर जीवन...

Inspirational

कभी न्याय कर पाता है भीतरी जीवन से कभी छटपटाता रह जाता है

1    60 0

साये

Romance

लेकिन विरह के इन अंधेरों में

1    11 0

जख्म

Tragedy

ऐसा जख्म लगा है, तुम्हारे जाने से जो कभी भर नहीं सकता....।

1    305 0

पहले सी नहीं रही

Abstract

खोने लगी अँधेरों में हो गई उदास वह अब उस पर इलज़ाम लगाता की बदल गई है वो पहले सी नहीं...

1    4 0

विश्वास की चाबी

Inspirational

बहुत सहेजकर रखना कभी खोने न देना....।

1    31 0

एक सन्नाटे में...

Others

आती रहती है उड़-उड़ कर तेरी यादों की चिट्ठियां

1    234 22

जीवन के पार...

Abstract

देह से परे कहीं भूल जाता है चेतन अपने उद्गम को

1    187 39

लक्ष्य

Inspirational

जब तक हासिल न कर लूँ अपना लक्ष्य.....

1    48 0

मोहरा

Abstract

चलते हैं एक-एक घर तेरे ही हिसाब से.....।

1    261 27

गीले मौसम

Romance

जब भी मेरे तुम्हारे बीच इस घर में ये गीले मौसम आते हैं

1    260 48

समय की रेत.....

Inspirational

कितना चाहा मुट्ठी में कसना पर सम्भव नहीं हो पाया रोक लेना लम्हों को भर लेना अंजुरी में.....

1    29 0

निर्मल निर्झर सी तू जिंदगी...

Others

हाथ में हाथ डाले झूमते इठलाते दिन पहले की मस्ती के याद बहुत है आते

1    8 1

आदिम प्रेम...

Inspirational

हो जाये एकाकार सृष्टि के कण-कण से....।

0    1 39

आदिम प्रेम...

Inspirational

हो जाये एकाकार सृष्टि के कण-कण से....।

1    29 0

उठो अब...

Abstract

एक नयी रौशनी लिख दो अपनी आने वाली नस्लों के नाम।

1    452 2

मौन में...

Abstract

और मैं अपने मौन में प्रयत्न कर रही हूँ उसके सृजन की साक्षी होने का...।

1    45 0

वो चाहती थी

Drama

वह अब उस पर इल्जाम लगाता की बदल गई है वो पहले सी नहीं रही...।

1    5 0

वह

Tragedy

खुद तिल-तिल सुलगकर राख होती रहती है.....।

1    222 39

वर्जनाएँ

Inspirational

अब सारी वर्जनाओं से मुक्त आज स्वयं असीमित आकाश हूँ मैं।

1    7 0

दिल की तलहटी में

Romance

वक्त की लहरों में जो छूट गए थे हाथ से.....।

1    311 15

चलो आज चलते हैं

Romance

गिनना चाहती हूँ तारों को मैं, चाँद पर बैठना चाहती हूँ, थोड़ी देर...

1    251 24

सीमा

Drama

मेरे प्यार की कोई सीमा नहीं है.....।

1    88 2

एक प्याला चाय

Romance

कहि आणखी मन की बातें उठती हैं चाय के प्याले से गर्म भाप की उष्मीय आत्मीयता के साथ

1    92 1

एक पेड़ की हत्या

Children Inspirational

गिर जाते हैं मिट्टी में दाने, सूखे फल जो जमा कर रखे थे गिलहरी ने आने वाले समय के लिए टहनियों के ...

1    42 2