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Suryakant Tripathi Nirala

  Literary Captain

मार दी तुझे पिचकारी,

Classics

मुसका दी, आभा ला दी

1    88 4

पत्रोत्कंठित जीवन का विष

Classics

क्रीड़ाएँ व्रीड़ा में परिणत । मल्ल भल्ल की-- मारें मूर्छित हुईं, निशाने चूक गए हैं ।

1    141 7

प्रियतम

Classics

बोले विष्‍णु, "नारद जी, आवश्‍यक दूसरा एक काम आया है तुम्‍हें छोड़कर कोई और नहीं कर सकता।

2    185 6

भेद कुल खुल जाए

Classics

ताक पर है नमक मिर्च लोग बिगड़े या बनें

1    74 2

तोड़ती पत्थर

Classics

एक क्षण के बाद वह काँपी सुघर, ढुलक माथे से गिरे सीकर, लीन होते कर्म में फिर ज्यों कहा- "मैं तोड़त...

1    137 6

मरा हूँ हजार मरण

Classics

कट-कटकर रहा काल

1    110 4

वर दे, वीणावादिनि वर दे।

Classics

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव; नव नभ के नव विहग-वृंद को नव पर, नव स्...

1    120 4

तुम हमारे हो

Classics

फिर वही पहले के से वार हु‌ए

1    117 4

ध्वनि

Classics

पुष्प-पुष्प से तन्द्रालस लालसा खींच लूँगा मैं, अपने नवजीवन का अमृत सहर्ष सींच दूँगा मैं,

1    131 5

प्रिय यामिनी जाएगी

Classics

खुले केश अशेष शोभा भर रहे

1    77 3

संध्या सुंदरी

Classics

कवि का बढ़ जाता अनुराग, विरहाकुल कमनीय कंठ से, आप निकल पड़ता तब एक विहाग!

1    83 5

मौन

Classics

आओ,एक पथ के पथिक-से

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पथ आंगन में रख कर आई

Classics

लहरें सरसी पर उठ-उठकर गिरती हैं सुन्दर से सुन्दर, हिलते हैं सुख से इन्दीवर, घाटों पर बढ आई काई।

1    252 10

मद भरे ये नलिन

Classics

आह! कितने विकल-जन-मन मिल चुके;

1    132 6

बाँधो न नाव इस ठाँव, बंधु!

Classics

वह हँसी बहुत कुछ कहती थी, फिर भी अपने में रहती थी,

1    150 6

जागो फिर एक बार!

Classics

सवा-सवा लाख पर एक को चढ़ाऊंगा

1    1.5K 6