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Raskhan Kavya

  Literary Captain

आवत है बन ते मनमोहन

Classics

अभीत इतै करिगौ कछु ख्याला

1    112 5

मोरपखा मुरली बनमाल

Classics

अब तौ रसखान सनेह लग्यौ, कौउ एक कह्यो कोउ लाख कह्यो री।

1    164 7

कानन दै अँगुरी रहिहौं

Classics

अटा चढ़ि गोधुन गैहै पै गैहै

1    15 1

प्रेमवाटिका

Classics

शास्‍त्रन पढ़ि पंडित भए, कै मौलवी कुरान। जुए प्रेम जान्‍यों नहीं, कहा कियौ रसखान।।

4    131 5

आई सबै ब्रज गोपालजी ठिठकी

Classics

आई सबै ब्रज गोपालजी ठिठकी

1    170 7

दानी नए भए माँबन दान सुनै

Classics

जेहै जो भूषण काहू तिया कौ तो मोल छला के लाला न विकेहो।

1    112 6

नो लख गाय सुनी हम नंद के

Classics

लाज गहो कछू होइ सयाने

1    179 9

लाडली लाल लर्तृ लखिसै अलि

Classics

त्यौं रसखानि न जानि परै सुखमा तिहुँ, लोकन की अति बाढ़ी।

1    153 9

मोर के चंदन मोर बन्यौ दिन दूलह

Classics

दिन जोरी बनी विधवा सुखकंदन

1    80 4

इक और किरीट बसे दुसरी दिसि

Classics

रसखानि पितंबर एक कंधा पर वघंबर राजत री।

1    66 3

यह देखि धतूरे के पात चबात

Classics

फनि सों कफनी पहरावत हैं

1    218 11

बेद की औषद खाइ कछु न करै

Classics

नित पथ्य अपथ्य बने तोहिं पोसे

1    153 8

कंचन मंदिर ऊँचे बनाई के

Classics

ऐसी भए तो कहा रसखानि जो

1    110 4

प्रेम अगम अनुपम अमित

Classics

दृढ़ निश्चय नहिं होत बिन किये प्रेम अनुकूल

1    91 3

धूरि भरे अति सोहत स्याम जू

Classics

वा छवि को रसखान विलोकत, वारत काम कलानिधि कोटी

1    254 9

सेस गनेस महेस दिनेस

Classics

जाहि अनादि अनंत अखण्ड

1    281 3

या लकुटी अरु कामरिया

Classics

रसखान कबौं इन आँखिन सों, ब्रज के बन बाग तड़ाग निहारौं।

1    172 9

मानुस हौं तो वही

Classics

धुरि भरे अति सोहत स्याम जू, तैसी बनी सिर सुंदर चोटी।

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