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Ravikant Raut

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  Literary Brigadier

हमारी पहली दिवाली

Romance

वहीं कहीं पास रखी पूजा की थाली का चुपके से मुस्कुरा पड़ना

1    7.0K 4

एक बैंकर का प्रेम पत्र

Drama Romance

तेरे पिता की इच्छा थी मैं रहूँ, ‘रिज़र्व-बैंक’ की तरह, सदा तेरे संग...!

2    7.3K 4

मिला, जो मांगा था !

Inspirational

ये कविता पिता और परिवार के रिश्तों का आयना है ।

2    20.7K 14

तज़ुर्बा

Drama

रास्ते की ठोकरों ने, इतना तो तज़ुर्बा, दे ही दिया है मुझे...!

1    1.4K 7

रिश्ता

Others

'तुम्हारी मोहब्बत मुझसे नहीं, मेरे ज़िस्म के उन हिस्सों से है, जिन्हें तुम देखना चाहते हो ।' रिश्ता द...

1    6.7K 6

ये मध्यमवर्गीय

Drama

इस क़दर चुप लगाते हुये कि, खुद से भी बात करने की, हिम्मत नहीं पड़ती ।

1    13.4K 9

मैं आँसू बटोर लाता हूं

Others Inspirational

सैकड़ों आँसू यूं ही नहीं खज़ाने में मेरे,जब भी कोई रोता है, उसके आंसू बटोर लाता हूँ.

1    14.1K 2

उम्मीद किससे लगायें

Others

बढ़ती  उम्र ,मायने अलग,सामने जगह पाती ,पुरानी होती शराब . पिछ्वाड़े से भी पीछे धकेला जाता ,बूढ़ा बाप...

1    20.2K 5

ऋतु परिवर्तन

Others

“ चटाख”....... फिर एक शीशा दरक़ा , हो गयी सुबह , आ कर , इस पत्थर ने बताया

1    20.6K 5

कपड़ा भी भेष बदलता है

Others

 मुर्दा मज़ारों , इबादत-ख़ानों की मरमरी दीवारों ,           समाधी के पत्थरों  , अरे !! चूमने की तुम्...

1    6.8K 4

माँ

Others

तेरा बड़प्पन , ना बख़ानी माँ  मेरी , तू प्यारी माँ   --------रविकांत राऊत

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मैं अपना देख़ूँ , कि तुम्हारा

Others

मैं अपना देखूँ, कि तुम्हारा प्रस्तावना : देखा है किसी और देश में धन की पूजा होते ,भारत में होती है ...

1    20.4K 7

सूखे पत्ते की सिसक़ी

Others

गर्मी की एक शाम लोड-शेडिंग के कारण गर्मी से निज़ात पाने मैं अपने बरामदे की सीढ़ीयों पर आ कर बैठा ही था...

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