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Pratap Sehgal

  Literary Colonel

सपना भी एक घर है

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देखना चाहता था अपने बालपन में भोगे हुए मैदान, गलियाँ सटे हुए मकान खंडहरों के अँधेरे कोनों में हिलकते...

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विदिशा में हूँ तुम कहाँ हो कालिदास

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सुबह-सुबह भी सड़क की धूल माहौल में कोहरे की तरह फ़ैली हुई थी मुझे कालिदास से मिलना था विदिशा में।

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गणतंत्र दिवस-2013 अमर जवान ज्योति पर

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यह दो हज़ार तेरह की छब्बीस जनवरी है सुबह का रंग सर्द है और धूप का गुनगुना अमर जवान ज्योति पर

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कोणार्क

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तेरहवीं सदी के समाज के गवाह हैं कोणार्क के पत्थर गवाह हैं उस वक़्त के शहंशाहों और लोगों के दिलों की ध...

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किलों की दुनिया

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किलों की दीवारें मजबूत होती हैं और किलों में बंद औरतें किले का सामान कुछ लोग भी होते हैं किलों में ब...

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