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Tarkesh Kumar Ojha

*लेखक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में रहते हैं और वरिष्ठ पत्रकार हैं।

  Literary Colonel

झेलो अब प्रचंड प्रहार

Inspirational

गांव - गांव - शहर दर शहर उमड़ पड़ा भावनाओं का ज्वार

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भारत में बसे कई भारत

Tragedy

सचमुच एक भारत में बसे कई भारत।

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क्या मैं हूँ देशभक्त

Inspirational

देशभक्ति के ज्वार में नहीं दी किसी को गाली चाहे भूख से जलती रहे आंत कभी नहीं पीसता अपने दाँत

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रोना नहीं तू कभी हार के

Drama Inspirational

चौंक उठा तब जब मिली जीत, गमों से कर ली दोस्ती, बगैर लाग-लपेट के...!

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सावन की पुकार.

Drama

फिर अचानक कैसे बदल गया परिदृश्य सोच कर भी दुखी है मन - प्राण निरुत्तर से हैं मानों भगवान।।

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सावन की पुकार

Others

'बुलाते हैं धतुरे के वो फूल, धागों की डोर, बाबा धाम को जाने वाले रास्ते, गंगा तट पर कांवरियों का कोल...

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मेरे बाबा तो भोलेनाथ...

Drama

क्योंकि मेरे बाबा तो भोलेनाथ ...

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बचपन की वे यादें

Drama

मामूली हैं मगर बहुत खास हैं बचपन की वे यादें...!

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माँँ कसम

Comedy Drama

माँँ कसम ! क्या गरम है रे भाई !

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शुक्रिया भी कहते हैं

Drama

शुक्रिया भी कहते हैं !

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जमाने की न जाने , ये कैसी बयार

Drama

ज़माने की न जाने यह कैसी बयार है !

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देश की मुआवजे की राजनीति

Drama

मुआवज़े की राजनीति

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