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Sandeep pandey

मैं संदीप पाण्डेय हूँ , उर्दू और हिन्दी में लिखता हूँ। I am a retired army Officer. तख़ल्लुस Sandey ज़ाहिद लिखता हूँ।

  Literary Colonel

जातिवाद के विरूद्ध

Abstract

खुदा का मुन्तख़ब है सारा ज़माना देखो।

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ज़र्द पत्ते

Tragedy

दिया जलता रहा राह तकता रहा, वो ना आए तेरा रतजगा हो गया। हमदम तेरा हमराह दुश्मन हुआ, वक़्त बदला तेरा...

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क़ासिद

Abstract Others

क़ासिद के हाथ दे दो ख़त खुला हुआ ऐसा नहीं लिखा है के चर्चा करें कोई।

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चर्चा ना कर ...

Tragedy

दश्त-ओ-सहरा रेत पानी सब का है अपना वजूद शम्स हो माहताब हो सब का है अपना वजूद तू क़ैद में माज़ी की ...

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अब आए हो...

Tragedy

गए वो दोस्त जो हमराह मेरे हमदम थे, अकेले महफ़िल जमाने का फ़ायदा क्या है। जब बढ़ गए हैं नाखूं उनक...

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दो राहें

Abstract Inspirational

यूँ ही अनवरत चलने से हर चाहें मिल जाती है।

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