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Anita Singh

  Literary Captain

ग़ज़ल 2

Others

जिनके घर चूल्हे सोते  हैं उनके कण्ठ निवाले रखना

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क़यामत

Others

ख़ुदा के सामने होगा कोई जो फैसला होगा  अदालत वो न समझेंगे, वकालत हम न समझेंगे।

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ग़ज़ल

Others

वो  मीठा बोलता है पिंजरे का, सुआ है।

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ग़ज़ल 7

Others

गुलों पर डोलता है वो भँवरा, मनचला है।

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ग़ज़ल 6

Others

नज़रों  से  दूर  तो  गया , दिल  से  न जा सका उस दौर ए रब्त ओ जब्त की फुरकत  अज़ीब थी।

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ग़ज़ल

Others

हमेशा हमने कोशिश की न हो हमसे  खफ़ा कोई अगर वो रुठ जाये तो मनाना है बहुत मुश्किल 

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ग़ज़ल

Others

चन्दा  की  चांदनी  को भी , तेरी तलाश थी मैंने पता दिया तेरा , गुलफ़ाम  लिख  दिया।  

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ग़ज़ल

Others

नही ले सके उनके रहमोकरम को ज़रूरत तो थी, पर बेचारे नहीं थे।

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ग़ज़ल

Others

मेरे ग़म  को जानकर  वो और रुसवा  कर गये मुस्कराहट के तले , चेहरे  बदलना आ गया।

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