कोट्स New

ऑडियो

मंच

पढ़ें

प्रतियोगिता


लिखें

साइन इन
Wohoo!,
Dear user,

नोट : कन्टेन्ट क्रमांक चुने हुए जोनर के तहत फिल्टर में प्रदर्शित होंगे : tragedy

रोज प्यार से तुम अपने, आँचल में मुझे छुपाती read more

1     355    21    317

अपने नन्हें बच्चों की लाशें सड़ते देखता हूँ, अश्वतथामा की याद में द्रोण सा चिल्ला read more

1     70    3    8710

नन्हे कोमल हाथों से बर्तन चमकाता है वो कारखानों में भारी बोझ उठाता है वो बड़े read more

1     208    2    4384

आज ये एक दुःख़द कल्पना है बच्चों ,तुमसब बच्चे यदि न चेते तो ये कजल की भयवाह सच्चाई read more

2     335    1    1989

आँसू
© Rekha Bora

Children Stories Tragedy

नयनों से दर्शाते read more

1     3    0    6002

वो दर्द की रात थी... तेज बरसात read more

2     21.0K    19    235

इन्द्र देव इस बार कुछ, ज्यादा ही नाराज़ लग रहे हैं, मुसीबत शायद देवलोक में है, जमीन read more

1     15.6K    639    19

ये माना कि हर तरफ पीने के पानी की कमी है लेकिन जीव पर अत्याचार, बारिश की बेरहमी read more

1     1.5K    464    4

गूंगे बहरे शासन पर या खूनी सिंहासन पर उस बच्ची के जले शरीर पर या अपने देश read more

1     1.9K    117    7

तू मेरी पुकार तक ना सुन पाई मां तू मेरी पुकार तक ना सुन पाई read more

2     534    36    337

घर बनाये झोले ले जाते थे जहाँ वो चारदीवारी ढूंढ रहा read more

1     253    38    725

हम बिस्तर होने को मजबूर कराया था ! मैं हर रात वही खड़ी होजाती हूँ ! भूखे बच्चों के read more

1     372    35    806

न जाने क्यों मिलने पर हमारे ऐतराज़ था बहुत ज़माने को शामिल हो गए सारे एक तरफ और read more

1     414    52    9

जब तख्त की ज़ुबाँ बोलनेे लगे अखबार, तो कैसे लिख दूँ कि कलम की ताकत अभी ज़िंदा read more

1     21.3K    61    22

सड़क पे निजी और धार्मिक कार्यक्रम आज़ादी है आज भीड़ द्वारा संदिग्ध की मार पीट आज़ादी read more

1     5.4K    476    10

मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली read more

1     13.5K    7    3866

एक आग वो भी थी जो चुपके से भीतर आ गई सोते हुए ग़रीब मजदूरों की जिंदगी read more

1     616    47    63

तिल वाला अंगूठा से मोबाइल में आर्टिकल लिख रही थी आजकल स्त्रियाँ सेफ नहीं read more

2     7.3K    83    1216

सुन नहीं सकूँगी मैं टन - टन ज़िंदगी की ! मैं कौन read more

1     800    65    81

कहने को दो-दो घर मेरे, फिर भी मैं पराई हूँ read more

1     288    68    88

हर घटना का कारण है, जीवन में जो भी हो रहा है, उसको उसका काम करने दो, वो आपको देख रहा read more

2     14.6K    592    33

एक के बाद एक थे मनाते मौत की read more

1     62    8    4140

घूट घूट के मरने से अच्छा, तुम्हे खुशी से जीने की आजादी दी है, तुम्हे मुझसे दूर read more

1     358    53    124

यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है कभी read more

2     14.0K    3    4610

करवट बदलने पर भी जो सहम जाते थे चीखें मार -मार कर जो आवाज़ लगाते थे एक पल भी जो read more

2     914    109    101

चुपचाप खामोश और वह फिर तत्पर हो जाती है एक और चुभन सहने के read more

1     734    18    141

इस भरी जवानी में ही, मुझे ओल्ड कर read more

1     339    50    619

माँ की हिदायत, उल्हाना मत दिलवाना ! भाई ने कहा, बुज़ुर्गों की नाक मत कटवाना read more

1     438    65    144

छोड़ दिया था उस, बच्ची का हाथ आपने, जब वो थी अपनी माँ के कोख़ read more

2     20.1K    178    56

यह कविता समाज में किसान के साथ होते अन्याय को आवाझ देती है read more

2     14.3K    75    157